*लौरिया प्रखंड के  गोंनौली डुमरा पंचायत में मनरेगा योजना में मस्टरोल में बन रही मजदूरों की फर्जी हाजरी।*

*मनरेगा घोटाला*

पश्चिमी चम्पारण बेतिया :-

बिहार में मनरेगा (MGNREGA) घोटाले का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है।मामला  पश्चिम चंपारण  जिले के *लौरिया*  प्रखंड के गोंनौली डुमरा पंचायत  का है जहाँ  मनरेगा कार्यों में जबरदस्त धांधली का मामला प्रकाश में आया है।

*पंचायत गोनौली डुमरा* के कार्य कोड की बात करे तो: *0512005/FP/20407669*,

*0512005/RC/20683748,*

*0512005/RC/20548215*


*पहला* *कार्य का नाम* -

  गोनौली डुमरा मे अवधेश मल्ल के खेत से संतोष यादव के खेत तक बांध का मरमती कार्य, जिसका मस्टर रोल 13628 है

 *दूसरा कार्य:-*

घुरा यादव के घोठा से लालबाबू यादव के खेत मिटी भराई एवं इटीकरण कार्य, जिसका मस्टर रोल 13640 है

*तीसरा कार्य*

कैलाश दास के घर से नेमि मांझी के खेत तक मिटी भराई एवं इटीकरण एवं फेवर ब्लॉक निर्माण कार्य, जिसका मस्टर रोल 13642 है।

अगर बात करे तो इस पंचायत में बिगत कई दिनों से फर्जी तरीकों से हाजिरी बनाई जा रही है। जब हमारी   न्यूज़ नाइन टाइम्स टीम को मिली सूत्रों के हवाले से जानकारी के अनुसार पिछले कई दिनों से यहाँ सिर्फ बिना काम किए हुए मजदूर का फोटो को  योजना मे डाली जा रही है।हम नही कह रहे है, डाली गई फोटो मे देख सकते है। इससे यह स्पस्ट हो रहा है की सिर्फ कागजों पर कार्यों को किया जा रहा है। इस मामले की खुलासा तो तब हुई जब हमारी  टीम धरातल पर पहुँच कर स्थानीय लोगों और ग्रामीणों से जानकारी प्राप्त की।

*1.गवन* सरकारी पेपरों की बात करें तो  प्रतिदिन *56से लेकर 78 मजदूरों की फर्जी हाजिरी पिछले कई दिनों से लगाई जा रही है।*

*17/03/26से लेकर 23/03/26 तक*

 हमारी न्यूज़ टीम के द्वारा   लौरिया प्रखंड के  गोंनौली डुमरा पंचायत की जमीनी पड़ताल की गई जिसमें  *475 मजदूरों की हाजरी लगाई गई है जिसमें सिर्फ मजदूरी के नाम पर *1.21,125* रु  बनता है  जबकि सिर्फ पेपर पर कार्य हो रहा है,धरातल पर कुछ नही किया गया… 

*सवाल यह उठता है की ?*

*महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत चल रहे कार्यों में *बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा** सामने आया है। *फर्जी हाजिरी, मजदूरों की गैरमौजूदगी, और सरकारी धन के गबन* के  मामले उजागर हुए हैं। इस भ्रष्टाचार से न केवल *सरकारी धन की लूट* हो रही है, बल्कि *गरीब मजदूरों के अधिकारों का भी हनन* किया जा रहा 

है।  जबकि  इस योजना में ग्रामीणों को 100 दिन की  रोजगार की गारंटी दी जाती है जिस से वहां के स्थानीय लोगों का विकाश हो सके।


*प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत!* 

इन गड़बड़ियों से यह साफ हो रहा है कि *स्थानीय प्रशासन, पंचायत प्रतिनिधि, रोजगार सेवक और PO (प्रोग्राम ऑफिसर) की मिली भगत के बिना इतना बड़ा घोटाला संभव नहीं हो सकता।*

✔ पंचायत प्रतिनिधियों की *अनदेखी या मिली भगत* इस भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है।  

✔ रोजगार सेवक *फर्जी हाजिरी लगाकर सरकारी धन की बंदरबांट* कर रहे हैं।  

✔ *PO (प्रोग्राम ऑफिसर) की  *भूमिका संदेह के घेरे में* है, क्योंकि बिना उनकी स्वीकृति के मजदूरी भुगतान संभव नहीं।  



*कार्रवाई की मांग*

✔ इन घोटालों की *गहन जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई* की जाए।  

✔ *फर्जी हाजिरी और फर्जी भुगतान* की उच्च स्तरीय जांच कर * धोखाधड़ी से निकाली जा रही राशि को वसूली जाए।**  

✔ *मनरेगा योजनाओं की निगरानी के लिए पारदर्शी और जवाबदेही प्रणाली लागू की जाए।*  



*इससे स्पष्ट रूप से  केंद्र सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना की विश्वनिता को कटघरे में खड़ा कर रहा है।* पंचायत में भी रोजगार देने के नाम पर लूट हो रही है। इस योजना को कामधेनु बनाने में सार्थक साबित होता दिख रहा है। अब सवाल यह उठता है कि,सरकार योजना बनाती है,उसे लागू कर राशि आवंटित भी करती है।इन योजनाओं को क्रियान्वयन  के लिए विभाग के साथ ही अधिकारी एवं कर्मचारियों के साथ एक बड़ी फौज निगरानी के लिए नियुक्त की है। इसके बावजूद अधिकारी इस योजना पर निगरानी करने के वजाय इस योजना को कमाई का एक स्रोत मान बैठे हैं। ना विभाग के द्वारा भ्रष्टाचारियों पर कोई कार्रवाई की जा रही है, जिसके कारण मनरेगा में आए दिन भ्रष्टाचार एक नए कृतिमान बना रहा है।सवाल यह उठता है कि केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा भ्रष्टाचार की बलि चढ़ रहा है फिर भी ओहदेदार पदाधिकारी इस पर मौन धारण किए हुए

*रिपोर्ट:  पश्चिमी चम्पारण से संजय कुमार की ब्यूरो रिपोर्ट