रामनगर प्रखंड अंतर्गत भावल पंचायत में मनरेगा घोटाले का पर्दाफाश: कागजों पर लाखो की लूट, ज़मीनी हकीकत शून्य!
न्यूज़ 9 टाइम्स पश्चिमी चंपारण रामनगर (बिहार) से ब्यूरो रिपोर्ट
बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के रामनगर प्रखंड में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत एक विशाल घोटाले का खुलासा हुआ है। वही विशेष जमीनी पड़ताल में सामने आया है कि धरातल पर कार्य नगण्य हैं, लेकिन कागजों पर लाखो की बंदरबांट जारी है।
भावल पंचायत मे सबसे बड़े घोटाले की गवाह जमीनी पड़ताल में पता चला है कि मनरेगा योजनाओं में भारी पैमाने पर फर्जी हाजिरी भरकर सरकारी धन की लूट की जा रही है। *भावल पंचायत के कार्य कोड*: 0512006/आईसी/20632316 *मस्टर रोल* : 429 *कार्य का नाम*: ग्राम फूलवरिया मे रकटू सोखा के खेत से सरल राय के खेत तक पोइन सफाई कार्य, जिसमे 45 मजदूरों का फर्जी हजारी बनाई जा रही है। अगर इस पंचायत की बात करें तो *04/05/2026 से 11/05/2026 तक 360* मजदूरो की हाजरी बनाई गई है. जिसमे सिर्फ मजदूर के नाम पर लगभग*92,000* बनता है।
https://youtu.be/J5LxUgWnjx0
जांच में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे हैरान करने वाले हैं: *NMMS ऐप बना घोटाले का डिजिटल हथियार!* जहाँ सरकार तकनीक के सहारे पारदर्शिता लाने की कोशिश कर रही है, वहीं भ्रष्टाचारी उसी तकनीक का दुरुपयोग कर रहे हैं। NMMS (नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम) ऐप पर मजदूरों की हाजिरी फोटो खींचकर अपलोड की जा रही है — वो भी बिना काम कराए! फोटो तो असली है, पर हाजिरी पूरी तरह से फर्जी।
रोजगार सेवक और अधिकारी चुप क्यों हैं? जब हमारी न्यूज़ एजेंसी की टीम ने मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया, तो न तो कार्य स्थल पर मजदूर थे, और न ही कोई कार्य हो रहा था। वही वहाँ के लोगो से जानकारी मिला की कोई भी काम इस गांव मे नहीं हो रहा है। ये चुप्पी बहुत कुछ कह रही है — क्या यह सब कुछ अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और रोजगार सेवकों की मिलीभगत का नतीजा है? जनता की मांग — अब और चुप्पी नहीं, जांच होनी चाहिए! 1. *रामनगर प्रखंड* अंतर्गत भावल पंचायत में मनरेगा के तहत हुए कार्यों का स्वतंत्र सामाजिक अंकेक्षण कराया जाए। 2. जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की संलिप्तता फर्जी हाजिरी में पाई जाए, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। 3. NMMS ऐप के डेटा की एक स्वतंत्र और वैज्ञानिक तरीके से जांच कराई जाए।
गरीबों की गाढ़ी कमाई पर डाका डालने वालों को अब बख्शा नहीं जाना चाहिए। यदि जिला प्रशासन अब भी चुप रहा, तो यह सबसे बड़ी रोजगार योजना सिर्फ कागजों की योजना बनकर रह जाएगी।
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