*सिकटा प्रखंड के जगरनाथपुर पंचायत में मनरेगा योजना में मस्टरोल में बन रही मजदूरों की फर्जी हाजरी।*

*इस खेल में मनरेगा कार्यालय से लेकर रोजगार सेवक की अहम भूमिका।*

न्यूज़ नाइन टाइम्स की संपादकीय रिपोर्ट 

सिकटा प्रखंड में मजदूरों को रोजगार की गारंटी देने वाली केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी  मनरेगा योजना  को मुखिया, पंचायत समिति सदस्य,मनरेगा पीओ, पंचायत रोजगार सेवक एवं पदाधिकारीओ के लिए कामधेनु गाय साबित हो रही हैं। इस योजना में भ्रष्टाचार  रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है यूँ कहे भ्रष्टाचार चरम पर है, साथ ही रोज़गार गारंटी योजना के नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।





*मामला* पश्चिमी चंपारण जिले के सिकटा प्रखंड के ग्राम पंचायत जगरनाथ पुर का है।जहाँ इस पंचायत के कार्य कोड की बात करे तो

 *0512010004/WC/20744344*

 


*योजना का नाम* : नहर पुल से दीनानाथ सिंह के खेत तक पइन का सफाईकार्य, जिसका मस्टर रोल 82 है।





 इस योजना में एनएमएमएस पर हर रोज 12 से 21 मजदूरों की  फर्जी हाजरी बनाई जा रही है, लेकिन जब कार्यस्थल  का मुआयना किया गया तो  वहां कोई भी मजदूर उपस्थित नही पाया गया।वही स्थानीय ग्रामीणों का कहना कि  यहा पहले ही पोइन का काम हुआ है कभी कभी  चार पांच  लोग आते हैं और फोटो खिंचवा कर चले जाते हैं।और वही एनएमएमएस पर हर रोज  मजदूरों वाली फोटो लगाकर हर रोज 12 से 21 मजदूरों की हाजरी बनाई जा रही है। इस योजना के तहत एनएमएस पर डाली गई फोटो मे आप देख सकते है किसी मजदूर का दुकान मे तो किसी का अपने दरवाजे पर तो किसी मजदूर का फोटो से फोटो मिलाकर डाला गया है, दिखाए गए मजदूरों की संख्या स्पष्ट रूप से योजना की विश्वनिता को कटघरे में खड़ा कर रहा है।



 पंचायत में भी रोजगार देने के नाम पर लूट हो रही है।इससे ज्यादा क्या कहूं। इस योजना को कामधेनु बनाने में मनरेगा के सभी पदाधिकारी के द्वारा सार्थक साबित होता दिख रहा है। अब सवाल यह उठता है कि,सरकार योजना बनाती है,उसे लागू कर राशि आवंटित भी करती है।इन योजनाओं को क्रियान्वयन  के लिए विभाग के साथ ही अधिकारी एवं कर्मचारियों को निगरानी के लिए नियुक्त किया गया है। इसके बावजूद अधिकारी इस योजना पर निगरानी करने के वजाय इस योजना का कमाई का एक स्रोत मान बैठे हैं। *मनरेगा योजना मे आखिर कब भ्रष्टाचार रुकेगा*?